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1992

हर्षद मेहता घोटाला

1990 से 1992 के बीच स्टॉक ब्रोकर हर्षद मेहता ने बैंकिंग प्रणाली की एक खामी का फायदा उठाकर इंटर-बैंक प्रतिभूति लेनदेन से पैसा निकाल कर बंबई शेयर बाज़ार में लगाया। इस धन से उन्होंने एक विशाल तेज़ी उत्पन्न की जिसने सेंसेक्स को 1990 में लगभग 1,000 से अप्रैल 1992 में 4,500 से ऊपर ले गई।

मेहता एक 'बिग बुल' बन गए — पहली बार निवेश करने वाली एक पीढ़ी के प्रेरणास्रोत। हज़ारों छोटे निवेशकों ने जीवन भर की बचत शिखर पर लगाई। अप्रैल 1992 में पत्रकार सुचेता दलाल ने घोटाले का पर्दाफाश किया। बाज़ार तत्काल गिरा, लगभग ₹1,000 करोड़ का निवेशक धन साफ हो गया। बैंकों को अपने बैलेंस शीट में विशाल छेद मिले।

इस प्रकरण ने भारतीय वित्तीय नियमन को नए सिरे से आकार दिया। SEBI को असली प्रवर्तन शक्तियाँ मिलीं। सट्टेबाज़ी की बदला प्रणाली अंततः समाप्त हुई। घोटाले ने दिखाया कि 1991 के सुधारों के बाद खुले नए पूंजी बाज़ार कितने नाज़ुक थे — और नियामकीय विफलता का खुदरा निवेशकों पर कितना विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।

1992 में कीमतें

सेंसेक्स

2,615 pts

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