टेपर टैंट्रम
मई 2013 में अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष बेन बर्नानके ने संकेत दिया कि Fed 2008 से चल रहे मात्रात्मक सहजता कार्यक्रम को कम कर सकता है। यह संकेत उभरते बाज़ारों से पूंजी के तेज़ बहाव को वापस मोड़ने के लिए काफी था।
भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में था। रुपया हफ्तों में ₹54 से ₹68 तक गिरा — 1991 के बाद की सबसे तेज़ गिरावट। भारत का चालू खाते का घाटा GDP के लगभग 5% तक फूल गया था — जो देश को पूंजी प्रवाह के किसी भी उलटफेर के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता था।
RBI ने आपात उपाय किए — ब्याज दरें बढ़ाईं, सोने के आयात पर कड़े प्रतिबंध लगाए और रुपये को स्थिर किया। सोने पर लगे आयात प्रतिबंध कई वर्षों तक बने रहे — इससे घरेलू सोने की कीमत अंतर्राष्ट्रीय कीमतों से ₹10,000 प्रति 10 ग्राम तक ऊपर ट्रेड करती रही और सोने की तस्करी का एक विशाल समानांतर बाज़ार खड़ा हुआ।
2013 में कीमतें
USD/INR
₹58.60/$
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