पेट्रोल नियंत्रण मुक्त
25 जून 2010 को भारत सरकार ने पेट्रोल की दशकों पुरानी नियंत्रित मूल्य प्रणाली समाप्त की। नई व्यवस्था में पेट्रोल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तेल विपणन कंपनियाँ निर्धारित करती हैं — ठीक वैसे जैसे अधिकांश अन्य देशों में। यह निर्णय किरीट पारिख समिति की सिफारिश पर लिया गया।
अब जब वैश्विक तेल महँगा होता, भारत में पेट्रोल की कीमत सीधे बढ़ती — कभी-कभी रातोरात ₹2-4 प्रति लीटर। सरकार अब राजकोषीय नुकसान उठाए बिना उपभोक्ताओं को वैश्विक झटकों से नहीं बचा सकती थी।
इस बदलाव ने एक दोहरा जोखिम पैदा किया जो आज भी प्रासंगिक है — क्योंकि कच्चे तेल का मूल्य डॉलर में होता है, रुपये की कमज़ोरी हर तेल मूल्य वृद्धि को और बड़ा कर देती है। 2010 की विनियमन-मुक्ति वही संरचनात्मक कारण है जिससे पेट्रोल 2010 के ₹50 से 2022 तक ₹105 तक पहुँचा।
2010 में कीमतें
पेट्रोल
₹47.12/L
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