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1973

तेल संकट

अक्टूबर 1973 में OPEC के अरब सदस्यों ने इज़राइल का समर्थन करने वाले देशों पर तेल प्रतिबंध लगाया। कुछ ही महीनों में वैश्विक तेल की कीमत चार गुना हो गई। भारत, जो लगभग सारा तेल आयात करता था, तुरंत और बुरी तरह प्रभावित हुआ।

एक साल में पेट्रोल ₹1.06 से ₹1.80 प्रति लीटर हो गया — भारतीय पेट्रोल इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि। पूरे देश में ईंधन स्टेशनों पर लंबी लाइनें लग गईं। मुद्रास्फीति ऊँची उड़ने लगी क्योंकि परिवहन लागत ने हर क्षेत्र को प्रभावित किया। सरकार ने वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था की और घरेलू उत्पादन में तेज़ी लाई — जिसका परिणाम 1974 में बॉम्बे हाई तेल क्षेत्र की खोज के रूप में सामने आया।

सोना भी मुद्रास्फीति से बचाव के रूप में तेज़ी से बढ़ा, जो भारतीय परिवारों की आर्थिक संकट में सोने पर निर्भरता को दर्शाता है। 1973 का तेल संकट भारतीय पेट्रोल इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण मूल्य घटना मानी जाती है — जिसने ईंधन की कीमत को भारतीय राजनीति और समाज के केंद्र में हमेशा के लिए स्थापित कर दिया।

1973 में कीमतें

पेट्रोल

₹1.06/L

सोना

₹278.5/10g